भारत में 2026 का मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, एल नीनो (El Niño) की स्थिति के कारण देश में बारिश कम और अनियमित हो सकती है, जिसका सीधा असर खेती, जलसंकट और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
क्या है एल नीनो और कैसे करता है असर?
एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इससे हवाओं की दिशा और बारिश का पैटर्न बदल जाता है।
सामान्य परिस्थितियों में मजबूत हवाएं भारत की ओर नमी लेकर आती हैं, जिससे अच्छी बारिश होती है। लेकिन एल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे भारत में नमी कम पहुंचती है और मानसून कमजोर या अनियमित हो जाता है।
भारत की खेती पर बड़ा खतरा
भारत की लगभग 75 से 80 प्रतिशत खेती मानसूनी बारिश पर निर्भर है। एल नीनो वाले वर्षों में केवल बारिश कम नहीं होती, बल्कि उसका वितरण भी असमान हो जाता है।
ऐसी स्थिति में:
मानसून देर से शुरू हो सकता है
बीच में लंबे सूखे दिन आ सकते हैं
अचानक भारी बारिश की घटनाएं बढ़ सकती हैं
इसका असर फसलों की बुवाई, वृद्धि और उत्पादन पर पड़ता है। समय पर पानी न मिलने से बीज अंकुरित नहीं हो पाते और फसलें कमजोर हो जाती हैं। वहीं अचानक तेज बारिश से मिट्टी और खाद बह सकती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जल संकट भी बढ़ सकता है
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तापमान के कारण वाष्पीकरण तेजी से बढ़ेगा। इससे कुएं, तालाब और बांधों का जलस्तर घट सकता है और कई इलाकों में पीने के पानी की किल्लत भी पैदा हो सकती है।
2026 मानसून को लेकर क्या कहता है अनुमान?
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुमान के अनुसार, 2026 में मानसून दीर्घकालीन औसत (LPA) का लगभग 92 प्रतिशत रह सकता है। यानी इस बार सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
इसके साथ ही:
बारिश के दिनों की संख्या कम हो सकती है
सूखे दिनों की अवधि बढ़ सकती है
तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है
पहले भी दिख चुका है एल नीनो का असर
साल 2002 और 2015 में भी एल नीनो के कारण भारत में कमजोर मानसून देखने को मिला था। कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बन गई थी और कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ था।
इसी अनुभव को देखते हुए विशेषज्ञ 2026 को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
विशेषज्ञों ने किसानों को अभी से तैयारी शुरू करने की सलाह दी है। इसके तहत:
वर्षा जल संचयन पर ध्यान दें
कम अवधि वाली या सूखा सहन करने वाली फसलें चुनें
केवल बारिश पर निर्भर न रहें
मौसम विभाग की सलाह और अपडेट नियमित रूप से लेते रहें
अगर बारिश सामान्य के आसपास भी रहे, लेकिन उसका समय और वितरण सही न हो, तो सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए 2026 का मानसून खेती और जल प्रबंधन दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।


